डीप स्लीप नॉन-REM नींद का सबसे गहरा चरण है, जिसे N3 या स्लो-वेव स्लीप भी कहते हैं। यह रात का वह हिस्सा होता है जब आपकी हृदय गति और सांस सबसे नीचे आ जाती है और दिमाग धीमी, स्थिर डेल्टा तरंगों पर चला जाता है। इसी दौरान शरीर मरम्मत का ज़्यादातर काम करता है, मांसपेशियों को दोबारा बनाने से लेकर रोग प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत करने तक। ज़्यादातर स्वस्थ वयस्क कुल नींद का करीब 15% से 25% हिस्सा डीप स्लीप में बिताते हैं, जो आमतौर पर रात में 40 से 110 मिनट बैठता है।

डीप स्लीप नॉन-REM नींद का तीसरा और आखिरी चरण है। नींद दो हिस्सों में बंटी होती है: नॉन-REM नींद और REM (रैपिड आई मूवमेंट) नींद। नॉन-REM नींद में तीन चरण होते हैं और N3 ही डीप स्लीप है।
शरीर पूरा नींद चक्र करीब हर 90 से 110 मिनट में पूरा करता है। ज़्यादातर लोग एक रात में चार से छह चक्र से गुज़रते हैं। डीप स्लीप रात के शुरुआती हिस्से में ज़्यादा होती है, जबकि REM सुबह की तरफ बढ़ती जाती है।
पूरे चक्र में डीप स्लीप की जगह कुछ ऐसी है:
| चरण | इसका मतलब | क्या होता है |
|---|---|---|
| N1 | हल्की नींद | नींद में उतरने का समय। सांस और धड़कन धीमी पड़ने लगती है और मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं। |
| N2 | हल्की से मध्यम नींद | शरीर का तापमान गिरता है और दिमाग में स्लीप स्पिंडल कहलाने वाली गतिविधि की छोटी लहरें दिखती हैं। सबसे ज़्यादा समय आप इसी चरण में बिताते हैं। |
| N3 (डीप स्लीप) | गहरी नींद | दिमाग की धीमी तरंगें हावी हो जाती हैं और नींद टूटना मुश्किल हो जाता है। |
| REM | सपनों वाली नींद | दिमाग की गतिविधि दोबारा जागने के स्तर के करीब पहुंच जाती है। ज़्यादातर सपने यहीं आते हैं, जबकि मांसपेशियां कुछ देर के लिए स्थिर रहती हैं। |
डीप स्लीप को अक्सर सबसे ज़्यादा रिकवरी देने वाली नींद कहा जाता है, क्योंकि रिकवरी की कई प्रक्रियाएं स्लो-वेव स्लीप से जुड़ी हैं।
शोध स्लो-वेव स्लीप को याददाश्त की प्रोसेसिंग और दिन में सीखी बातों को पक्का करने से जोड़ते हैं। इस चरण के साथ ऐसे हार्मोनल और शारीरिक बदलाव भी होते हैं जो पूरे शरीर की रिकवरी में मदद करते हैं।
डीप स्लीप का इम्यून और हार्मोन सिस्टम से भी गहरा नाता है। शोध बताते हैं कि नींद इम्यून प्रतिक्रिया को संभालने में मदद करती है, जबकि स्लो-वेव स्लीप के साथ ग्रोथ हार्मोन का स्राव बढ़ जाता है।
इसका मतलब यह नहीं कि सिर्फ डीप स्लीप ही अहम है। N1, N2, N3 और REM सबका अलग काम है। अच्छी नींद पूरे चक्र से गुज़रने पर टिकी है, किसी एक चरण को बढ़ाने पर नहीं।
हर रात कितने मिनट डीप स्लीप चाहिए, इसकी कोई एक सर्वमान्य सिफ़ारिश नहीं है।
डीप स्लीप हर व्यक्ति में स्वाभाविक रूप से अलग होती है और उम्र के साथ बदलती रहती है। स्लो-वेव स्लीप बचपन में सबसे ज़्यादा होती है, किशोरावस्था में काफ़ी घट जाती है और उम्र बढ़ने के साथ आमतौर पर और कम होती जाती है।
इसीलिए किसी तय प्रतिशत को छूने की कोशिश करने से बेहतर है कि कुल नींद पर ध्यान दिया जाए। CDC की सलाह है कि 18 से 60 साल के वयस्क रोज़ कम से कम सात घंटे सोएं। बाकी उम्र के समूहों में ज़रूरत थोड़ी अलग होती है।
अगर आप किसी वियरेबल से नींद ट्रैक करते हैं तो यह समझना भी काम आता है कि अच्छा sleep score कैसा दिखता है, क्योंकि डीप स्लीप पूरी तस्वीर का एक ही हिस्सा है।
कुछ आदतें बाकी सब से ज़्यादा फ़र्क डालती हैं:
नहीं। डीप स्लीप नॉन-REM नींद का N3 चरण है। REM अलग चरण है, जिसमें दिमाग की गतिविधि जागने जैसी हो जाती है और ज़्यादातर सपने आते हैं। डीप स्लीप रात के शुरुआती हिस्से में ज़्यादा होती है, जबकि REM के दौर सुबह की ओर लंबे होते जाते हैं।
सबके लिए कोई एक मात्रा सामान्य नहीं होती। डीप स्लीप उम्र के साथ बदलती है और एक रात से दूसरी रात में अलग हो सकती है। आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ यह घटती जाती है।
ज़रूरी नहीं। लक्ष्य किसी एक चरण को बढ़ाना नहीं है। अच्छी नींद का मतलब है रात भर नॉन-REM और REM नींद के बीच आना-जाना।
रुझान देखने के लिए ये काम के हैं, लेकिन क्लिनिकल स्लीप स्टडी जितने सटीक नहीं, क्योंकि ज़्यादातर वियरेबल दिमाग की गतिविधि के बजाय हृदय गति और हरकत से नींद के चरण का अंदाज़ा लगाते हैं। अगर डिवाइस चुनते समय नींद ट्रैकिंग आपके लिए सबसे अहम है, तो सही फ़िटनेस ट्रैकर चुनने पर हमारी गाइड लोकप्रिय विकल्पों के कुछ अंतर समझाती है।
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